निवेश करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है अपने investment portfolio को समय-समय पर संतुलित रखना। जब मार्केट में उतार-चढ़ाव आता है, तो हमारे पोर्टफोलियो की एसेट वैल्यू बदल जाती है, जिससे हमारा तय किया हुआ संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में, समय पर rebalance करना जरूरी होता है ताकि जोखिम कम हो और रिटर्न स्थिर बना रहे। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि rebalance portfolio क्या होता है, यह क्यों ज़रूरी है, कब और कैसे किया जाना चाहिए, और इसके क्या फायदे हैं।
Rebalance Portfolio क्या है?
जब आप निवेश शुरू करते हैं, तो आप अपने पैसों को अलग-अलग एसेट क्लास (जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड, रियल एस्टेट आदि) में एक निश्चित अनुपात में बाँटते हैं।
मान लीजिए आपने तय किया कि आपका पोर्टफोलियो 70% इक्विटी और 30% डेट में रहेगा। कुछ समय बाद अगर मार्केट में इक्विटी का प्रदर्शन बेहतर रहता है, तो इक्विटी का हिस्सा बढ़कर 80% हो सकता है। अब आपका पोर्टफोलियो असंतुलित हो गया है। इसे फिर से 70-30 के अनुपात में लाना ही portfolio rebalancing कहलाता है। यानी rebalance portfolio का मतलब है—अपने निवेश को उस अनुपात में वापस लाना जो आपने शुरू में तय किया था।
Rebalance Portfolio क्यों जरूरी है?
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जोखिम नियंत्रण (Risk Management):
अगर किसी एक एसेट क्लास का हिस्सा ज़्यादा बढ़ जाए, तो पूरा पोर्टफोलियो अधिक जोखिम वाला हो जाता है।
Rebalance पोर्टफोलियो से आप जोखिम को फिर से नियंत्रित कर सकते हैं। -
निश्चित रिटर्न बनाए रखना:
लंबे समय में संतुलित पोर्टफोलियो बेहतर और स्थिर रिटर्न देता है। -
Discipline बनाए रखना:
कई बार मार्केट में तेजी देखकर निवेशक अधिक इक्विटी में निवेश बढ़ा देते हैं।
Rebalancing पोर्टफोलियो से आप भावनात्मक निर्णयों से बचते हैं। -
Profit Booking का मौका:
जब आप rebalance पोर्टफोलियो करते हैं, तो महंगे एसेट को बेचकर सस्ते एसेट में निवेश करते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से प्रॉफिट बुकिंग होती है।
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Rebalance Portfolio कब करें?
कई निवेशक पूछते हैं कि portfolio rebalancing कितनी बार करनी चाहिए। इसका कोई फिक्स रूल नहीं है, लेकिन कुछ सुझाव नीचे दिए गए हैं:
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साल में एक बार:
अधिकांश विशेषज्ञ साल में एक बार rebalance पोर्टफोलियो करने की सलाह देते हैं। -
जब अनुपात 5–10% से बिगड़ जाए:
अगर आपके पोर्टफोलियो का संतुलन तय अनुपात से 5–10% तक बदल गया है, तो rebalancing जरूरी है। -
बड़े जीवन परिवर्तन के बाद:
जैसे नई नौकरी, शादी, घर खरीदना या रिटायरमेंट—इन परिस्थितियों में अपने लक्ष्य के अनुसार portfolio rebalance करें।
Rebalance Portfolio कैसे करें?
अब जानते हैं कि वास्तव में portfolio rebalance कैसे किया जाता है:
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अपने Current Portfolio की समीक्षा करें:
देखें कि आपके निवेश का अनुपात अभी कितना है — जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड इत्यादि में। -
Target Allocation तय करें:
मान लीजिए आपका लक्ष्य है 70% इक्विटी और 30% डेट।
इस आधार पर अंतर निकालें कि कहाँ ज़्यादा और कहाँ कम है। -
अतिरिक्त हिस्से को बेचें:
जहाँ निवेश ज्यादा बढ़ गया है (जैसे इक्विटी 80% हो गई है), वहां से कुछ हिस्सा बेचें। -
कम हिस्से में निवेश बढ़ाएं:
जो एसेट क्लास कम हो गया है, उसमें पैसा लगाएं ताकि पोर्टफोलियो वापस बैलेंस में आ जाए। -
SIP Adjust करें:
हर बार बेचने-खरीदने की बजाय आप अपनी SIP allocation बदलकर भी rebalance portfolio कर सकते हैं।
Portfolio Rebalance के फायदे
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कम जोखिम: जोखिम स्तर स्थिर रहता है।
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Better Returns: समय के साथ स्थिर और संतुलित रिटर्न मिलता है।
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Long-term Discipline: भावनात्मक निवेश से बचाव होता है।
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Goal Alignment: आपके निवेश लक्ष्य के अनुरूप पोर्टफोलियो बना रहता है।
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Low Volatility: अचानक मार्केट गिरावट से बचाव होता है।
Rebalance Portfolio में होने वाली गलतियाँ
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बहुत बार Rebalance करना:
ज़रूरत से ज़्यादा बार पोर्टफोलियो बदलने से ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है। -
टैक्स इफेक्ट को नज़रअंदाज़ करना:
हर बार बेचने-खरीदने से कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है। इसलिए rebalance portfolio करते समय टैक्स असर भी सोचें। -
लक्ष्य को भूल जाना:
आपका portfolio rebalancing हमेशा आपके फाइनेंशियल गोल्स के अनुरूप होना चाहिए।
Automated Portfolio Rebalance Option
आजकल कई Robo-Advisors और Mutual Fund Platforms ऑटोमैटिक portfolio rebalancing सुविधा देते हैं। ये आपके पोर्टफोलियो को समय-समय पर ट्रैक करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर ऑटो-रीबैलेंस कर देते हैं। अगर आप व्यस्त हैं या खुद से करने का अनुभव नहीं रखते, तो यह तरीका बहुत उपयोगी है। Zerodha Varsity पर पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग सीखें
Rebalance Portfolio Example
मान लीजिए आपने ₹10 लाख का पोर्टफोलियो बनाया —
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₹7 लाख इक्विटी में
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₹3 लाख डेट में
एक साल बाद इक्विटी की वैल्यू बढ़कर ₹9 लाख और डेट की ₹2.8 लाख हो गई।
अब अनुपात हो गया 76% इक्विटी और 24% डेट।
अब आप ₹60,000 की इक्विटी बेचकर डेट फंड में निवेश करते हैं ताकि अनुपात फिर से 70-30 हो जाए।
यही है rebalance portfolio करने का आसान तरीका।
Faqs:- अक्सर पूछे जानें वाले सवाल
Q1. Rebalance Portfolio क्या है?
Rebalance Portfolio का मतलब है अपने निवेश को तय अनुपात में फिर से संतुलित करना ताकि जोखिम और रिटर्न का सही संतुलन बना रहे।
Q2. Portfolio Rebalancing कितनी बार करनी चाहिए?
आमतौर पर साल में एक बार या जब पोर्टफोलियो का अनुपात 5–10% से ज्यादा बदल जाए, तब Rebalance Portfolio करना चाहिए।
Q3. Portfolio Rebalance करने के फायदे क्या हैं?
यह जोखिम कम करता है, रिटर्न को स्थिर रखता है और निवेश में अनुशासन बनाए रखता है।
Q4. Portfolio Rebalance करने का सही तरीका क्या है?
अपने मौजूदा निवेश का मूल्य देखें, तय अनुपात से तुलना करें और जरूरत अनुसार बेचकर या खरीदकर संतुलन बहाल करें।
Q5. क्या Mutual Fund निवेश में भी Portfolio Rebalancing जरूरी है?
हां, अगर आपके फंड्स का अनुपात बदल गया है तो Mutual Funds में भी Portfolio Rebalance करना उपयोगी होता है।
Q6. Rebalancing से टैक्स का असर पड़ता है क्या?
हाँ, जब आप किसी एसेट को बेचते हैं तो उस पर Capital Gain Tax लग सकता है, इसलिए Rebalancing करते समय टैक्स का ध्यान रखें।
Q7. क्या Portfolio Rebalancing ऑटोमैटिक तरीके से की जा सकती है?
हाँ, आज कई Robo-Advisors और Investment Platforms ऑटोमैटिक Portfolio Rebalance की सुविधा देते हैं।
🔹 निष्कर्ष: क्या हर निवेशक को Rebalance Portfolio करना चाहिए?
बिलकुल! चाहे आप छोटे निवेशक हों या बड़े, हर किसी को साल में कम से कम एक बार Portfolio Rebalance जरूर करना चाहिए। यह आपकी निवेश यात्रा को अधिक अनुशासित, संतुलित और लाभदायक बनाता है। याद रखें, निवेश का असली लक्ष्य केवल रिटर्न नहीं बल्कि संतुलन और स्थिरता है — और यह तभी संभव है जब आप नियमित रूप से Portfolio Rebalance करते रहें।
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