ETF kya hota hai in Hindi? ETF (Exchange Traded Fund) एक ऐसा निवेश साधन है जो शेयर बाजार में स्टॉक्स की तरह खरीदा और बेचा जाता है। यह फंड विभिन्न परिसंपत्तियों जैसे स्टॉक्स, बॉन्ड्स, गोल्ड या किसी इंडेक्स को ट्रैक करता है। ETF का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो देना है, जिससे जोखिम कम हो सके। इसमें निवेश करना आसान और पारदर्शी होता है क्योंकि इसकी कीमत शेयर बाजार में रीयल-टाइम अपडेट होती रहती है। साथ ही, ETF से जुड़े नियम SEBI द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं, जिससे यह सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश विकल्प बन जाता है।
- ETF कैसे काम करता है? | ETF kya hota hai in Hindi
- ETF और म्यूचुअल फंड में अंतर | ETF vs Mutual Fund in Hindi
- ETF के प्रकार | Types of ETF in Hindi
- ETF में निवेश के फायदे और नुकसान | Pros and Cons of ETF in Hindi
- ETF में निवेश कैसे करें? | Step by Step Guide in Hindi
- ETF खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- ETF किसके लिए उपयुक्त है?
- ETF का टैक्सेशन क्या है? | जानिए ETF पर टैक्स कैसे लगता है
- FAQs – ETF kya hota hai in Hindi
- निष्कर्ष
ETF कैसे काम करता है? | ETF kya hota hai in Hindi
ETF kya hota hai in Hindi समझने के बाद, यह जानना ज़रूरी है कि ETF वास्तव में काम कैसे करता है।
ETF एक ऐसा फंड है जो शेयर बाजार में ट्रेड होता है और Nifty 50, Sensex या किसी अन्य इंडेक्स को ट्रैक करता है। इसमें कई कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं, जिससे निवेशक एक साथ डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बना सकते हैं।
ETF की यूनिट्स स्टॉक की तरह बाजार में खरीदी-बेची जाती हैं। इसकी कीमत दो तरह से तय होती है:
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NAV (Net Asset Value): जो फंड की कुल संपत्ति पर आधारित होती है और रोज़ तय की जाती है।
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Market Price: जो शेयर बाजार में दिनभर मांग और आपूर्ति के आधार पर बदलती रहती है।
ETF म्यूचुअल फंड की तरह मैनेज होता है, लेकिन इसकी ट्रेडिंग स्टाइल स्टॉक जैसी होती है। यानी आप इसे किसी भी ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म से आसानी से खरीद-बेच सकते हैं। कम खर्च, पारदर्शिता और डाइवर्सिफिकेशन ETF को स्मार्ट निवेश विकल्प बनाते हैं।
ETF काम करने की प्रक्रिया (Step by Step)
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फंड हाउस पोर्टफोलियो तैयार करता है – चुने गए इंडेक्स (जैसे Nifty 50) के आधार पर।
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ETF यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध की जाती हैं।
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निवेशक इन यूनिट्स को शेयर की तरह खरीद-बेचते हैं।
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ETF का मूल्य बाजार की मांग और उस इंडेक्स के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
ETF और म्यूचुअल फंड में अंतर | ETF vs Mutual Fund in Hindi
निवेशक अक्सर सोचते हैं कि ETF (Exchange Traded Fund) और Mutual Fund में क्या फर्क है और किसमें निवेश करना बेहतर है। नीचे तालिका में दोनों के बीच मुख्य अंतर दिए गए हैं:
| बिंदु | ETF (Exchange Traded Fund) | म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) |
|---|---|---|
| ट्रेडिंग का तरीका | स्टॉक एक्सचेंज पर रियल टाइम में खरीदा/बेचा जा सकता है। | दिन के अंत में NAV पर खरीदा/बेचा जाता है। |
| प्राइसिंग | पूरे दिन बाजार में कीमत बदलती रहती है। | एक बार प्रतिदिन NAV के अनुसार कीमत तय होती है। |
| खर्च (Expense Ratio) | कम खर्च, खासकर पैसिव ETF में। | अपेक्षाकृत अधिक, खासकर एक्टिव फंड्स में। |
| डिमैट अकाउंट | डिमैट अकाउंट जरूरी होता है। | जरूरी नहीं, सीधे फंड हाउस या ऐप से निवेश कर सकते हैं। |
| SIP की सुविधा | सीमित या उपलब्ध नहीं। | नियमित SIP निवेश की सुविधा मिलती है। |
| लिक्विडिटी (Liquidity) | अधिक, क्योंकि इसे शेयर की तरह तुरंत बेचा जा सकता है। | अपेक्षाकृत कम, रिडेम्प्शन में समय लगता है। |
| पारदर्शिता (Transparency) | अधिक पारदर्शिता, होल्डिंग्स लाइव देख सकते हैं। | सीमित पारदर्शिता, रिपोर्ट मासिक या तिमाही में मिलती है। |
| प्रबंधन शैली (Management Style) | अधिकतर पैसिव (Index Based)। | एक्टिव और पैसिव दोनों विकल्प उपलब्ध। |
| न्यूनतम निवेश | ₹1 यूनिट के अनुसार। | ₹100 या ₹500 से शुरू। |
ETF के प्रकार | Types of ETF in Hindi
ETF kya hota hai in Hindi समझने के बाद, अब आइए जानते हैं कि भारत में निवेशकों के लिए कौन-कौन से प्रमुख प्रकार के ETF उपलब्ध हैं।
1. इंडेक्स ETF (Index ETF)
इंडेक्स ETF ऐसे फंड होते हैं जो किसी विशेष इंडेक्स जैसे Nifty 50 या Sensex को ट्रैक करते हैं। इसमें निवेश करके आप पूरे इंडेक्स के प्रदर्शन का लाभ उठा सकते हैं। ये पैसिव रूप से मैनेज होते हैं और डाइवर्सिफिकेशन के कारण रिस्क अपेक्षाकृत कम होता है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए यह एक आदर्श विकल्प है।
2. गोल्ड ETF (Gold ETF)
गोल्ड ETF सोने में निवेश का एक डिजिटल और सुरक्षित तरीका है। इसमें असली सोना नहीं बल्कि गोल्ड की कीमत को ट्रैक करने वाली यूनिट्स खरीदी जाती हैं, जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होती हैं। इसका फायदा यह है कि आप बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का लाभ ले सकते हैं।
3. बॉन्ड ETF (Bond ETF)
बॉन्ड ETF सरकार या कंपनियों द्वारा जारी किए गए बॉन्ड्स में निवेश करते हैं। ये अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इनमें फिक्स्ड इनकम मिलती है और रिटर्न स्थिर रहता है। नियमित आय चाहने वाले निवेशकों के लिए बॉन्ड ETF एक अच्छा विकल्प है।
4. सेक्टोरल ETF (Sectoral ETF)
सेक्टोरल ETF किसी विशेष सेक्टर जैसे बैंकिंग, आईटी, फार्मा आदि को ट्रैक करते हैं। अगर आपको लगता है कि किसी इंडस्ट्री का भविष्य मजबूत है, तो सेक्टोरल ETF में निवेश करके उस सेक्टर की टॉप कंपनियों के स्टॉक्स का फायदा उठा सकते हैं। हालांकि, इनमें रिटर्न अधिक लेकिन रिस्क भी थोड़ा ज्यादा होता है।
5. इंटरनेशनल ETF (International ETF)
इंटरनेशनल ETF विदेशी बाजारों या ग्लोबल इंडेक्स जैसे NASDAQ, S&P 500 को ट्रैक करते हैं। इनके जरिए आप बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों जैसे Apple, Amazon, Google में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश कर सकते हैं। यह आपके पोर्टफोलियो में ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन लाने का बढ़िया तरीका है।
ETF में निवेश के फायदे और नुकसान | Pros and Cons of ETF in Hindi
ETF में निवेश के फायदे
1. डाइवर्सिफिकेशन का लाभ
ETF में निवेश करके आप एक ही फंड के ज़रिए कई कंपनियों में हिस्सेदारी ले सकते हैं। इससे जोखिम कम होता है और पोर्टफोलियो संतुलित बनता है। लॉन्ग टर्म में यह स्थिरता और बेहतर रिटर्न देता है।
2. कम लागत (Low Cost Investment)
ETF का एक्सपेंस रेश्यो बहुत कम होता है क्योंकि ये अधिकतर पैसिव फंड होते हैं। इससे निवेशकों को कम फीस देकर ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
3. लिक्विडिटी (Liquidity)
ETF स्टॉक एक्सचेंज पर रियल-टाइम में खरीदे और बेचे जा सकते हैं। यानी बाजार खुला होने पर आप किसी भी समय ट्रेड कर सकते हैं।
4. पारदर्शिता (Transparency)
ETF की होल्डिंग्स रोज़ अपडेट होती हैं। इससे निवेशक को यह पता रहता है कि उसका पैसा कहां लगाया गया है।
5. टैक्स में लाभ
लॉन्ग टर्म में ETF पर कैपिटल गेन टैक्स म्यूचुअल फंड की तुलना में कम हो सकता है। इससे टैक्स बचत होती है और नेट रिटर्न बढ़ता है।
ETF में निवेश के नुकसान
1. एक्टिव मैनेजमेंट की कमी
अधिकांश ETF पैसिव रूप से मैनेज होते हैं। इसलिए मार्केट में अचानक आए अवसरों का पूरा फायदा नहीं ले पाते।
2. ब्रोकरेज और ट्रेडिंग फीस
ETF का एक्सपेंस रेश्यो भले ही कम हो, लेकिन हर बार खरीद-बिक्री पर ब्रोकरेज शुल्क देना पड़ता है। बार-बार ट्रेड करने पर यह खर्च बढ़ सकता है।
3. कम लिक्विडिटी वाले ETF की दिक्कत
कुछ ETF (जैसे सेक्टोरल या लो-वॉल्यूम ETF) में पर्याप्त खरीदार-विक्रेता नहीं होते। इससे सही दाम पर यूनिट्स बेचना मुश्किल हो सकता है।
4. मार्केट रिस्क से बचाव नहीं
ETF पूरी तरह बाजार पर निर्भर होते हैं। बाजार गिरने पर इनके NAV और प्राइस में भी गिरावट आती है।
5. डिमैट अकाउंट की आवश्यकता
ETF में निवेश करने के लिए डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट जरूरी है। नए निवेशकों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और झंझट हो सकता है, जबकि म्यूचुअल फंड सीधे खरीदे जा सकते हैं।
ETF में निवेश कैसे करें? | Step by Step Guide in Hindi
अगर आप सोच रहे हैं कि ETF में निवेश कैसे करें, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
1. सही ब्रोकर चुनें
Zerodha, Groww, Upstox या अन्य भरोसेमंद ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म चुनें।
2. Demat और ट्रेडिंग अकाउंट खोलें
ETF में निवेश करने के लिए Demat और Trading Account जरूरी है। इसके लिए KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया पूरी करें।
3. ETF सर्च करें
अपने निवेश लक्ष्य के अनुसार ETF चुनें – जैसे Nifty 50 ETF, Gold ETF, Bond ETF आदि।
4. निवेश का लक्ष्य तय करें
निर्धारित करें कि आपका उद्देश्य शॉर्ट-टर्म गेन है या लॉन्ग-टर्म निवेश। उसी आधार पर ETF का चुनाव करें।
5. बाजार खुलने पर ETF खरीदें
ETF की यूनिट्स स्टॉक की तरह एक्सचेंज पर खरीदी-बेची जाती हैं। जब बाजार खुला हो तब आप आसानी से ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं।
6. नियमित निगरानी रखें
अपने निवेश की समय-समय पर समीक्षा करें। ETF के रिटर्न, मार्केट ट्रेंड और अपने लक्ष्य पर नजर रखें।
ETF खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
ETF (Exchange Traded Fund) खरीदना शेयर बाजार में निवेश का एक स्मार्ट विकल्प है। लेकिन सही रिटर्न और कम जोखिम पाने के लिए निवेश से पहले इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें:
1. ETF का प्रकार चुनें
सबसे पहले तय करें कि आप किस तरह का ETF लेना चाहते हैं –
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Equity ETF (शेयर आधारित)
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Gold ETF (सोना आधारित)
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Debt/Bond ETF (फिक्स्ड इनकम आधारित)
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International ETF (विदेशी कंपनियों में अप्रत्यक्ष निवेश)
2. पिछले प्रदर्शन की जांच करें
ETF के पिछले 1, 3 और 5 साल के रिटर्न देखें। यह अंदाज़ा देता है कि फंड ने अलग-अलग समय में कैसा प्रदर्शन किया है।
3. Expense Ratio कम हो
कम एक्सपेंस रेश्यो वाले ETF चुनें, क्योंकि कम खर्च का मतलब आपके लिए ज़्यादा नेट रिटर्न।
4. Liquidity (तरलता)
हमेशा ऐसा ETF चुनें जिसे आप स्टॉक एक्सचेंज पर आसानी से खरीद-बेच सकें। कम लिक्विड ETF में सही दाम मिलना मुश्किल हो सकता है।
5. Tracking Error देखें
ETF का मुख्य काम इंडेक्स को ट्रैक करना है। इसलिए जितनी कम Tracking Error, उतना बेहतर ETF।
6. AUM (Assets Under Management)
ज़्यादा AUM वाले ETF ज़्यादा भरोसेमंद और स्थिर माने जाते हैं, क्योंकि उनमें निवेशकों का विश्वास और निवेश दोनों अधिक होता है।
7. निवेश लक्ष्य तय करें
हमेशा अपने financial goals के अनुसार ETF चुनें – चाहे वह शॉर्ट-टर्म गेन हो या लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन।
ETF किसके लिए उपयुक्त है?
ETF (Exchange Traded Fund) उन निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो कम खर्च, पारदर्शिता और डाइवर्सिफिकेशन के साथ बाजार में निवेश करना चाहते हैं। आइए जानें यह किन-किन के लिए सही है:
1. नए निवेशक (Beginner Investors)
जो लोग शेयर मार्केट में नए हैं और सीधे स्टॉक्स चुनने का रिस्क नहीं लेना चाहते, उनके लिए ETF आसान और सुरक्षित विकल्प है।
2. लंबी अवधि के निवेशक (Long-term Investors)
ETF लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए बेहतर है क्योंकि यह इंडेक्स को ट्रैक करता है और समय के साथ स्थिर रिटर्न देता है।
3. कम खर्च में पोर्टफोलियो बनाने वाले
ETF का Expense Ratio बहुत कम होता है, जिससे निवेशक कम लागत में डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बना सकते हैं।
4. इंडेक्स से फायदा उठाना चाहने वाले
अगर आप Nifty 50, Sensex या किसी अन्य इंडेक्स की ग्रोथ से फायदा लेना चाहते हैं लेकिन सीधे शेयरों में निवेश नहीं करना चाहते, तो ETF आदर्श है।
5. म्यूचुअल फंड का विकल्प खोजने वाले
ETF में फंड मैनेजर की गलती की संभावना कम होती है क्योंकि यह ज़्यादातर पैसिव तरीके से इंडेक्स को ट्रैक करता है।
6. नियमित ट्रेडिंग नहीं करने वाले
जो निवेशक बार-बार ट्रेडिंग नहीं करना चाहते लेकिन अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं, उनके लिए ETF उपयुक्त है।
7. स्मार्ट और विविध निवेश चाहने वाले
सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि गोल्ड ETF, बॉन्ड ETF और इंटरनेशनल ETF भी उपलब्ध हैं। इससे निवेशक अपने पोर्टफोलियो में ग्लोबल और सेक्टर-आधारित डाइवर्सिफिकेशन जोड़ सकते हैं।
ETF का टैक्सेशन क्या है? | जानिए ETF पर टैक्स कैसे लगता है
ETF (Exchange Traded Fund) पर टैक्स उसकी कैटेगरी (Equity या Debt) पर निर्भर करता है। टैक्सेशन के नियम लगभग म्यूचुअल फंड जैसे ही हैं।
1. Equity ETF टैक्सेशन
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शॉर्ट-टर्म (STCG):
अगर आप Equity ETF को 1 साल से पहले बेचते हैं, तो मुनाफे पर 15% टैक्स लगता है। -
लॉन्ग-टर्म (LTCG):
अगर होल्डिंग 1 साल से ज्यादा है, तो-
₹1 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है।
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₹1 लाख से ज्यादा पर 10% LTCG टैक्स लगता है (indexation benefit नहीं मिलता)।
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2. Debt ETF टैक्सेशन
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शॉर्ट-टर्म (STCG):
अगर Debt ETF को 3 साल से पहले बेचते हैं, तो मुनाफा आपकी कुल इनकम में जुड़कर income tax slab rate के अनुसार टैक्स होगा। -
लॉन्ग-टर्म (LTCG):
अगर होल्डिंग 3 साल से ज्यादा है, तो मुनाफे पर 20% टैक्स लगेगा, जिसमें indexation benefit भी मिलता है।
सरल शब्दों में,
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Equity ETF → 1 साल से पहले बेचने पर 15% टैक्स, 1 साल बाद ₹1 लाख तक छूट, उसके ऊपर 10% टैक्स।
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Debt ETF → 3 साल से पहले बेचने पर slab rate से टैक्स, 3 साल बाद 20% टैक्स + indexation benefit।
FAQs – ETF kya hota hai in Hindi
1. ETF क्या है?
ETF (Exchange Traded Fund) एक निवेश फंड है जो शेयर बाजार में स्टॉक्स की तरह खरीदा और बेचा जाता है। यह विभिन्न स्टॉक्स या इंडेक्स को ट्रैक करता है।
2. ETF कैसे काम करता है?
ETF की यूनिट्स स्टॉक की तरह ट्रेड होती हैं और इसका मूल्य इंडेक्स या फंड की संपत्ति (NAV) पर निर्भर करता है।
3. ETF के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
भारत में प्रमुख ETF प्रकार हैं: Equity/Index ETF, Gold ETF, Bond ETF, Sectoral ETF और International ETF।
4. ETF में निवेश करने के फायदे क्या हैं?
ETF में निवेश से आपको डाइवर्सिफिकेशन, कम खर्च, उच्च पारदर्शिता और आसानी से ट्रेड करने की सुविधा मिलती है।
5. ETF और म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?
ETF रियल-टाइम ट्रेड होता है, कम खर्चीला और पारदर्शी होता है, जबकि म्यूचुअल फंड दिन के अंत में NAV पर खरीदा-बेचा जाता है।
6. ETF में निवेश के लिए क्या ज़रूरी है?
ETF में निवेश करने के लिए डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट आवश्यक हैं, और निवेशक को मार्केट की बेसिक समझ होनी चाहिए।
7. ETF पर टैक्सेशन कैसे लागू होता है?
Equity ETF पर 1 साल से कम में 15% STCG और 1 साल बाद 10% LTCG टैक्स लागू होता है, Debt ETF पर 3 साल बाद 20% LTCG + indexation लाभ मिलता है।
निष्कर्ष
ETF kya hota hai in Hindi में ETF आज के समय में एक स्मार्ट, सस्ता और आसान निवेश विकल्प बन चुका है। यह म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के बीच का एक संतुलित विकल्प है, जहाँ निवेशक को कम लागत में डाइवर्सिफिकेशन, पारदर्शिता और स्थिर रिटर्न की संभावना मिलती है। अगर आप शेयर बाजार की गहराई से समझ नहीं रखते, लेकिन फिर भी एक सुरक्षित और विविध पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं, तो ETF आपके लिए एक आदर्श निवेश विकल्प साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख ETF kya hota hai in Hindi केवल शैक्षणिक और जानकारीपूर्ण उद्देश्य के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह, निवेश सिफारिश या टैक्स परामर्श नहीं है। निवेश में हमेशा जोखिम होता है, जिसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित है।
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Author :-
Niraj Mandal एक अनुभवी निवेशक और हिंदी फाइनेंस लेखक हैं। वे WealthVarta.com के संस्थापक हैं और वर्षों से SIP, शेयर बाजार और लॉन्ग टर्म निवेश जैसे विषयों पर सरल, भरोसेमंद जानकारी साझा कर रहे हैं।