Most Important Terms Used In Share Market In Hindi
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करना शुरू कर रहे हैं, तो सबसे पहले ज़रूरी है कि आप उस भाषा को समझें जो बाजार में बोली जाती है। जिस तरह क्रिकेट खेलने से पहले उसके नियम और शब्द समझने पड़ते हैं, उसी तरह शेयर बाजार में भी कुछ बुनियादी शब्दों को जानना बहुत जरूरी है। इस लेख में हम शेयर बाजार के 20 ऐसे महत्वपूर्ण शब्द समझाएंगे जो हर नए निवेशक के लिए अनिवार्य हैं।
- शेयर (Share)
- निफ्टी और सेंसेक्स (Nifty & Sensex)
- बुल मार्केट और बियर मार्केट (Bull & Bear Market)
- IPO (Initial Public Offering)
- डिविडेंड (Dividend)
- मार्केट कैप (Market Capitalization)
- PE Ratio (Price to Earnings Ratio)
- बाय और सेल ऑर्डर (Buy & Sell Order)
- स्टॉप लॉस (Stop Loss)
- वॉल्यूम (Volume)
- EPS (Earnings Per Share)
- Blue Chip Stock (ब्लू चिप स्टॉक्स)
- Portfolio (पोर्टफोलियो)
- Intraday Trading (इंट्राडे ट्रेडिंग)
- Technical Analysis (तकनीकी विश्लेषण)
- फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis)
- बोनस शेयर (Bonus Share)
- राइट्स इश्यू (Rights Issue)
- सर्किट लिमिट (Circuit Limit)
- लिक्विडिटी (Liquidity)
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शेयर (Share)
शेयर किसी कंपनी में निवेशक की हिस्सेदारी को दर्शाता है। जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के मालिकाना हक़ का एक हिस्सा खरीदते हैं। शेयरधारक कंपनी के मुनाफे में हिस्सा पाते हैं और कंपनी की बढ़त से लाभ उठा सकते हैं। शेयर दो प्रकार के होते हैं – इक्विटी शेयर (सामान्य शेयर) और प्रेफरेंस शेयर। इक्विटी शेयरधारकों को वोटिंग अधिकार भी मिलते हैं। शेयर बाजार में खरीद-बिक्री के जरिए आप शेयरों में निवेश कर सकते हैं। शेयरों में निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन इसमें जोखिम भी होता है। इसलिए शेयर खरीदते समय कंपनी की स्थिति और बाजार की समझ जरूरी होती है।
निफ्टी और सेंसेक्स (Nifty & Sensex)
निफ्टी और सेंसेक्स भारत के प्रमुख शेयर बाजार के इंडेक्स हैं।
सेंसेक्स में 30 बड़ी और महत्वपूर्ण कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं, जो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड होती हैं।
निफ्टी में 50 प्रमुख कंपनियों के शेयर होते हैं, जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ट्रेड होती हैं।
ये दोनों इंडेक्स भारतीय शेयर बाजार की समग्र स्थिति और आर्थिक स्वास्थ्य का परिचायक होते हैं। निवेशक इन इंडेक्स के आधार पर बाजार के रुझान का आकलन करते हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी में होने वाले बदलाव निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण संकेत होते हैं।
ये निवेश के निर्णयों में मार्गदर्शक का काम करते हैं।
बुल मार्केट और बियर मार्केट (Bull & Bear Market)
बुल मार्केट वह बाजार होता है जहाँ शेयरों की कीमतें लगातार बढ़ रही होती हैं और निवेशकों का विश्वास मजबूत होता है। इसके विपरीत, बियर मार्केट में शेयर की कीमतें गिरती हैं और बाजार में नकारात्मक माहौल होता है। बुल मार्केट में निवेशक उत्साहित होते हैं जबकि बियर मार्केट में सतर्क रहते हैं। दोनों मार्केट्स शेयर बाजार की सामान्य स्थिति हैं, जिनका सही समझ निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।
IPO (Initial Public Offering)
वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर जनता को बेचती है और स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध होती है। इससे कंपनी को पूंजी जुटाने में मदद मिलती है, जिसे वह अपने व्यापार के विस्तार या कर्ज चुकाने में उपयोग करती है। IPO में निवेशक कंपनी के शेयर खरीद सकते हैं और भविष्य में मुनाफा कमा सकते हैं। यह निवेश का शुरुआती अवसर होता है और नए निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प माना जाता है।
डिविडेंड (Dividend)
वह हिस्सा होता है जो कंपनी अपने शेयरधारकों को मुनाफे में से बांटती है। यह नकद या अतिरिक्त शेयरों के रूप में हो सकता है। डिविडेंड कंपनी की आर्थिक स्थिति और मुनाफे पर निर्भर करता है। निवेशकों के लिए यह नियमित आय का स्रोत होता है। उच्च डिविडेंड देने वाली कंपनियां आमतौर पर स्थिर और मजबूत मानी जाती हैं। डिविडेंड निवेशकों को उनके निवेश पर अतिरिक्त रिटर्न देता है और लॉन्ग टर्म निवेश के लिए आकर्षक विकल्प होता है। यह शेयर बाजार में निवेश का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
मार्केट कैप (Market Capitalization)
मार्केट कैप का मतलब है किसी कंपनी के सभी जारी किए गए शेयरों की कुल बाजार कीमत। इसे कंपनी के शेयर की वर्तमान बाजार कीमत और कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या को गुणा करके निकाला जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी के 1 करोड़ शेयर हैं और प्रत्येक की कीमत ₹500 है, तो मार्केट कैप ₹500 करोड़ होगी। मार्केट कैप से कंपनी का बाजार में आकार और महत्व पता चलता है। बड़ी मार्केट कैप वाली कंपनियां स्थिर और भरोसेमंद मानी जाती हैं, जबकि छोटी मार्केट कैप वाली कंपनियां ज़्यादा जोखिम और अधिक संभावित वृद्धि वाली होती हैं। निवेशकों के लिए मार्केट कैप समझना निवेश निर्णय में मददगार होता है।
PE Ratio (Price to Earnings Ratio)
PE Ratio एक महत्वपूर्ण फाइनेंशियल इंडिकेटर है जो कंपनी के शेयर की कीमत और उसकी प्रति शेयर आय (EPS) के बीच संबंध बताता है। इसे शेयर की वर्तमान मार्केट प्राइस को EPS से भाग देकर निकाला जाता है। यह निवेशकों को यह समझने में मदद करता है कि स्टॉक महंगा है या सस्ता। उच्च PE रेशियो का मतलब हो सकता है कि निवेशक कंपनी के भविष्य के विकास की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कम PE रेशियो कंपनी के कम मूल्यांकन को दर्शाता है। PE रेशियो का इस्तेमाल निवेश निर्णय और कंपनी की वैल्यूएशन के लिए किया जाता है। यह शेयर बाजार में निवेश के लिए एक जरूरी मापदंड है।
बाय और सेल ऑर्डर (Buy & Sell Order)
बाय ऑर्डर और सेल ऑर्डर शेयर बाजार में निवेशकों द्वारा दिए जाने वाले दो मुख्य आदेश हैं। बाय ऑर्डर का मतलब है किसी स्टॉक को खरीदने का आदेश देना, जबकि सेल ऑर्डर का मतलब होता है स्टॉक बेचने का आदेश। ये ऑर्डर ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म पर दिए जाते हैं और मार्केट की कीमत या प्री-सेट कीमत पर पूरे होते हैं। सही समय पर बाय और सेल ऑर्डर देना निवेश में मुनाफा कमाने के लिए जरूरी होता है। ट्रेडिंग में इनका सही उपयोग निवेशक को जोखिम कम करने और बेहतर रिटर्न पाने में मदद करता है।
स्टॉप लॉस (Stop Loss)
स्टॉप लॉस एक निवेश रणनीति है जो निवेशकों को नुकसान को सीमित करने में मदद करती है। यह एक प्री-निर्धारित कीमत होती है जिस पर निवेशक अपने स्टॉक को ऑटोमेटिकली बेच देता है ताकि अधिक नुकसान से बचा जा सके। उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹100 में शेयर खरीदा और स्टॉप लॉस ₹90 रखा, तो जब शेयर की कीमत ₹90 तक गिर जाएगी, तो वह अपने आप बिक जाएगा। स्टॉप लॉस खासकर इंट्राडे ट्रेडिंग और तेजी से बदलते बाजार में जरूरी होता है, जिससे भाव गिरने पर निवेशक के नुकसान को कंट्रोल किया जा सके। यह एक महत्वपूर्ण जोखिम प्रबंधन उपकरण है।
वॉल्यूम (Volume)
वॉल्यूम का मतलब है किसी स्टॉक या सिक्योरिटी की एक निश्चित समय में खरीदी और बेची गई कुल संख्या। यह शेयर बाजार में ट्रेडिंग एक्टिविटी का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। उच्च वॉल्यूम का मतलब होता है कि उस स्टॉक में अधिक लोग ट्रेड कर रहे हैं, जिससे उसकी लिक्विडिटी बढ़ती है। वॉल्यूम के आधार पर निवेशक यह समझ सकते हैं कि किसी प्राइस मूवमेंट के पीछे कितनी मजबूती है। उदाहरण के लिए, यदि शेयर की कीमत बढ़ रही है और वॉल्यूम भी ज्यादा है, तो यह एक मजबूत ट्रेंड माना जाता है। इसलिए वॉल्यूम का विश्लेषण तकनीकी ट्रेडिंग में जरूरी होता है।
EPS (Earnings Per Share)
EPS का मतलब है कंपनी की प्रति शेयर कमाई। इसे कंपनी के कुल शुद्ध लाभ को कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या से भाग देकर निकाला जाता है। EPS से पता चलता है कि कंपनी ने एक शेयर पर कितना मुनाफा कमाया है। यह निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक है क्योंकि इससे कंपनी की कमाई क्षमता और लाभप्रदता का आकलन होता है। उच्च EPS वाली कंपनियां आमतौर पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं। EPS का उपयोग शेयर की वैल्यू तय करने और निवेश निर्णय लेने में किया जाता है, इसलिए यह शेयर बाजार का एक महत्वपूर्ण फंडामेंटल इंडिकेटर है।
Blue Chip Stock (ब्लू चिप स्टॉक्स)
Blue Chip वे शेयर होते हैं जो किसी बड़ी, मजबूत और भरोसेमंद कंपनी से जुड़े होते हैं। ये कंपनियाँ वर्षों से स्थिर मुनाफा, अच्छा डिविडेंड और मजबूत प्रदर्शन देती आ रही हैं। ब्लू चिप कंपनियाँ आमतौर पर अपने सेक्टर की लीडर होती हैं और इनका मार्केट कैप बहुत बड़ा होता है। इन स्टॉक्स में निवेश को कम जोखिम वाला और दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित माना जाता है। जैसे – Reliance, TCS, HDFC Bank आदि। ब्लू चिप स्टॉक्स निवेशकों को स्थिर रिटर्न और भरोसेमंद ग्रोथ प्रदान करते हैं, इसलिए ये लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो के लिए आदर्श माने जाते हैं।
Portfolio (पोर्टफोलियो)
पोर्टफोलियो का मतलब है किसी निवेशक द्वारा रखे गए विभिन्न निवेशों का संग्रह, जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड, बांड, एफडी या रियल एस्टेट। यह दिखाता है कि आपने अपनी पूंजी को किन-किन जगहों पर निवेश किया है। एक संतुलित पोर्टफोलियो में जोखिम और रिटर्न का सही मिश्रण होता है, जिससे निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। विविधता (Diversification) पोर्टफोलियो की ताकत होती है, जिससे एक एसेट में नुकसान होने पर दूसरे में फायदा हो सकता है। अच्छा पोर्टफोलियो बनाना लंबी अवधि में स्थिर और सुरक्षित रिटर्न के लिए जरूरी होता है।
Intraday Trading (इंट्राडे ट्रेडिंग)
इंट्राडे ट्रेडिंग का मतलब होता है एक ही दिन के अंदर शेयरों को खरीदना और बेचना। इसमें ट्रेडर (व्यक्ति जो ट्रेड करता है) किसी स्टॉक को सुबह खरीदता है और बाजार बंद होने से पहले उसे बेच देता है। इसका उद्देश्य होता है दिन के छोटे-मोटे भावों के उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाना।उच्च जोखिम वाला होता है लेकिन अनुभवी ट्रेडर्स इसमें फायदा कमा सकते हैं।
Technical Analysis (तकनीकी विश्लेषण)
Technical Analysis [ तकनीकी विश्लेषण ] शेयर बाजार में कीमतों की भविष्यवाणी करने की एक विधि है, जिसमें पिछले मूल्य (price) और वॉल्यूम (volume) के आंकड़ों का अध्ययन किया जाता है। इसमें चार्ट्स, ट्रेंड्स, और इंडिकेटर्स जैसे मूविंग एवरेज, RSI, MACD आदि का उपयोग कर यह समझा जाता है कि किसी स्टॉक की कीमत आगे बढ़ेगी या गिरेगी। यह खासतौर पर इंट्राडे ट्रेडिंग और शॉर्ट-टर्म निवेश में काम आता है। इसमें कंपनी की फंडामेंटल जानकारी नहीं देखी जाती, बल्कि केवल कीमतों की चाल को देखा जाता है। सही तकनीकी विश्लेषण से बाजार में एंट्री और एग्जिट का सही समय तय किया जा सकता है। ट्रेडिंग करने वालों के लिए बेहद उपयोगी।
फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis)
फंडामेंटल एनालिसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भविष्य की ग्रोथ का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें कंपनी के बैलेंस शीट, आय विवरण (income statement), लाभ (profit), कर्ज (debt), मैनेजमेंट, इंडस्ट्री की स्थिति और अर्थव्यवस्था जैसे पहलुओं का विश्लेषण किया जाता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि किसी स्टॉक का वर्तमान मूल्य उसकी असली कीमत से अधिक है या कम। यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उपयोगी होता है, जो स्थिर और मजबूत कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। इससे स्टॉक की सही वैल्यू पहचानना संभव होता है।
बोनस शेयर (Bonus Share)
बोनस शेयर वे अतिरिक्त शेयर होते हैं जो कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को फ्री में देती है। यह शेयर holders को उनके मौजूदा होल्डिंग के अनुपात में दिए जाते हैं, जैसे 1:2 बोनस का मतलब है हर 2 शेयर पर 1 अतिरिक्त शेयर। कंपनी ये शेयर अपने रिज़र्व फंड से जारी करती है, जिससे उसके कैश पर असर नहीं पड़ता। बोनस शेयर कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं और निवेशकों का विश्वास बढ़ाते हैं। इससे शेयर की कीमत घट सकती है, लेकिन कुल निवेश का मूल्य लगभग समान रहता है। यह लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
राइट्स इश्यू (Rights Issue)
राइट्स इश्यू एक तरीका है जिससे कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को डिस्काउंटेड रेट पर नए शेयर खरीदने का अवसर देती है। इसमें शेयरधारकों को उनके मौजूदा होल्डिंग के अनुपात में नए शेयर खरीदने का “अधिकार” (Right) मिलता है, जैसे 1:4 राइट्स इश्यू का मतलब है हर 4 शेयर पर 1 नया शेयर खरीदने का विकल्प। यह कंपनी पूंजी जुटाने के लिए करती है, जैसे कर्ज चुकाने या विस्तार के लिए। राइट्स इश्यू में निवेश करना वैकल्पिक होता है। यह निवेशकों को सस्ते दाम पर शेयर बढ़ाने का मौका देता है और कंपनी में हिस्सेदारी बनाए रखने में मदद करता है।
सर्किट लिमिट (Circuit Limit)
सर्किट लिमिट शेयर बाजार में स्टॉक्स की अधिकतम बढ़त या गिरावट की सीमा होती है, जिसे स्टॉक एक्सचेंज तय करता है। इसका उद्देश्य अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बाजार को स्थिर रखना और निवेशकों की सुरक्षा करना होता है। जब किसी स्टॉक की कीमत तय सीमा से ज्यादा बढ़ती है तो उसे अपर सर्किट (Upper Circuit) कहा जाता है, और जब तय सीमा से ज्यादा गिरती है तो उसे लोअर सर्किट (Lower Circuit) कहते हैं। यह सीमा आमतौर पर 2%, 5%, 10% या 20% तक हो सकती है। सर्किट लगने के बाद उस दिन ट्रेडिंग रोक दी जाती है या सीमित कर दी जाती है।
लिक्विडिटी (Liquidity)
लिक्विडिटी का मतलब है किसी एसेट (जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड आदि) को तेजी से और बिना नुकसान के नकद में बदलने की क्षमता। शेयर बाजार में, जिस स्टॉक की खरीद और बिक्री आसानी से हो जाती है, उसे लिक्विड स्टॉक कहा जाता है। लिक्विडिटी जितनी ज्यादा होगी, उतना ही आसानी से आप ट्रेड कर सकते हैं, बिना दाम में बड़ी गिरावट या बढ़ोतरी के। उच्च लिक्विडिटी वाले शेयरों में बड़ा वॉल्यूम होता है और इनका स्प्रेड (buy-sell price gap) कम होता है। निवेश के लिहाज से लिक्विड स्टॉक्स सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि वे जल्दी खरीदे-बेचे जा सकते हैं।
शेयर बाजार डेटा
- https://www.nseindia.com (NSE)
https://www.bseindia.com (BSE)
रेगुलेटरी जानकारी
निष्कर्ष
शेयर बाजार में सफल निवेशक बनने के लिए आपको इसकी भाषा समझनी होगी। Most Important Terms Used In Share Market In Hindi ऊपर बताए गए 20 जरूरी शब्द हर नए निवेशक के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं। इन शब्दों की सही समझ आपको अधिक आत्मविश्वास से निवेश के निर्णय लेने में मदद करेगी।
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